जर्मनी में विकसित बॉक्सर एक छोटे कद की, माध्यम आकार की, छोटे बालों वाली कुत्ते की नस्ल है। इसकी त्वचा का आवरण चिकना और हल्के पीले (Fawn), चितकबरे, या सफ़ेद रंग का होता है या रिवर्स चितकबरे के साथ सफ़ेद धारियों से युक्त या सफ़ेद धारियों से रहित भी हो सकता है। बॉक्सर की खोपड़ी चौड़ी और छोटी होती है ब्रेकीसिफेलिक, इनकी थूथन वर्गाकार होती है, इनके मेंडीबुलर या जबड़े उदगतहनु (mandibular prognathism) प्रकार के होते हैं, (underbite अर्थात जबड़े अन्दर की और धंसे हुए से) जबड़े बहुत मजबूत होते हैं और एक बड़े शिकार को भी शक्ति के साथ काट सकते हैं। बॉक्सर अंग्रेजी बुलडॉग (English Bulldog) और अब विलुप्त हो चुके बुलेनबीसर (Bullenbeisser) के संकरण से बनाई गयी नस्ल है और मोलोसर (Molosser), मासटिफ समूह (mastiff group) का हिस्सा है।
बॉक्सर को सबसे पहले 1895 में मुनिच में सेंट बर्नार्ड के लिए किये गए एक डॉग शो में प्रदर्शन के लिए रखा गया, जो पहला बॉक्सर क्लब था। 2009 के अमेरिकी केनल क्लब के आंकड़ों के आधार पर, बॉक्सर संयुक्त राज्य अमेरिका में एक श्रृंखला में तीसरे साल के लिए कुत्तों की छठी सबसे लोकप्रिय नस्ल है-यह 2007 में सातवें स्थान से आगे आयी, 2002 के बाद से वे इसी स्थान पर बने हुए थे।

स्वरूप

सिर बॉक्सर का सबसे विशिष्ट लक्षण है। इस नस्ल का मानक लक्षण यह है कि यह शरीर के साथ उपयुक्त अनुपात में होना चाहिए और सबसे उपर यह बहुत हल्का नहीं होना चाहिए.

सबसे ज्यादा मूल्य इसकी थूथन के लिए लगाया जाता है, जो सही रूप में होनी चाहिए और खोपड़ी के साथ उपयुक्त अनुपात में होनी चाहिए. थूथन और पूरे सर की लम्बाई का अनुपात 1:3 होना चाहिए. नाक की जड़ के नीचे हमेशा वलन मौजूद होते हैं, जो नीचे की और थूथन के दोनों सिरों तक जाते हैं और नाक की जड़ थूथन की जड़ से कुछ उंची होनी चाहिए.

इसके अलावा बॉक्सर थोडा सा प्रोगनेथस (उदगतहनु) होना चाहिए, अर्थात नीचला जबड़ा उपरी जबड़े से परे थोडा बाहर निकला हुआ और थोडा सा उपर की ओर मुड़ा होता है जिसे सामान्यतया अंडरबाईट या “अंडरशोट बाईट” कहा जाता है।

बॉक्सर मूल रूप से एक डॉक्ड (पूंछ को काट कर छोटा किया गया) और क्रोप्ड थे, ओर इस परम्परा को अभी भी कुछ देशों में बनाये रखा गया है। हालांकि, पशु चिकित्सा संघों, पशु अधिकार समूहों ओर सामान्य जनता के दबाव के कारण, कानों की क्रोपिंग ओर पूंछ की डॉकिंग को दुनिया के कई देशों में निषिद्ध कर दिया गया है। प्राकृतिक रूप से छोटी पूंछ वाले (बोबटेल) बॉक्सर्स की एक किस्म पाई जाती है जिसे संयुक्त राष्ट्र में पूंछ की डोकिंग पर रोक लगाये जाने की प्रत्याशा में विकसित किया गया; इसके लिए कई पीढ़ियों तक नियंत्रित संकरण कराया गया, इन कुत्तों को 1998 में केनल क्लब (UK) रजिस्ट्री में स्वीकृत कर लिया गया और आज बोबटेल लाइन के प्रतिनिधि दुनिया के कई देशों में पाए जाते हैं।

हालांकि, 2008 में, FCI ने उनके नस्ल मानक में एक योग्य गलती के रूप में एक “स्वाभाविक रूप से गठीली पूंछ” को जोड़ दिया, अर्थात ये बॉक्सर एक ऐसी बोबटेल के साथ पैदा हुए (या कुछ मामलों में संकरित) जो FCI सदस्य देशों में बिलकुल भी दिखाई नहीं देती थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में 2009 के बाद से अब तक क्रोप्ड कानों वाले डॉग शो में अधिक सामान्य रूप से प्रदर्शित किये जाते हैं।

मार्च 2005 में AKC नस्ल का मानक बदल गया जिसे बिना क्रोप किये कान को वर्णित किया गया लेकिन बिना डोकिंग की पूछ के लिए गंभीर दंड को वर्णित किया गया।
एक वयस्क बॉक्सर का वजन आमतौर पर 55 और 70 पौंड (25 और 32 कि॰ग्राम) के बीच होता है। वयस्क नर बौक्सर की लम्बाई विथर्स पर 22 और 25 इंच (56 और 64 सेन्टीमीटर) के बीच होती है; वयस्क मादा की लम्बाई 21 से 23½ इंच (53 और 60 सेंटीमीटर) के बीच होती है।

आवरण और रंग

बॉक्सर एक छोटे बालों वाली नस्ल है, इसके शरीर पर एक चिकना, चमकदार आवरण होता है जो शरीर से कस कर चिपका हुआ होता है।

अधिकतर ये हलके पीले (Fawn) या चितकबरे रंग के होते हैं, अक्सर पेट का नीचला हिस्सा और सामने वाला हिस्सा या सभी चारों पैर सफ़ेद होते हैं। ये सफ़ेद निशान, जो फ्लैश कहलाते हैं, अक्सर गर्दन या चेहरे तक फैले होते हैं और जिन कुत्तों में ये निशान होते हैं, वे “फ्लैशी” कहलाते हैं।

“Fawn” जिसे यहां हल्का पीला कहा जा रहा है, वास्तव में रंगों की एक रेंज को बताता है, यह हलके टेन, या पीले से लेकर लाल टेन, महोगनी या हिरन/लाल हिरन जैसा लाल और गहरा शहद जैसा ब्लोंड तक हो सकता है। ब्रिटेन में, हलके पीले (fawn) रंग के बॉक्सर्स आम तौर पर गहरे रंग के होते हैं और “लाल” कहलाते हैं।

“चितकबरा (Brindle)” शब्द उन कुत्तों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिनमें पृष्ठभूमि हलके पीले (fawn) रंग की होती है जिस पर काली धारियां उपस्थित होती हैं। ये शुद्ध संकरित काले बॉक्सर्स हैं जो सफेद फ्लेश से युक्त होते हैं, लेकिन इन्हें आमतौर पर “काले” रंग से नहीं जाना जाता, बल्कि चितकबरे (brindle) रंग की श्रेणी में रखा जाता है। इस नस्ल के मानकों के अनुसार हलकी पीली (fawn) पृष्ठभूमि स्पष्ट रूप से चितकबरा रंग लिए हुए होती है, इसलिए एक कुत्ता जिसमें चितकबरा रंग बहुत ज्यादा प्रभावी हो उसे नस्ल के मानकों के द्वारा अयोग्य बताया जा सकता है।

स्वभाव (Temperament)

बॉक्सर्स की नस्ल एक उर्जावान और चंचल किस्म की नस्ल है जो बच्चों के साथ भी बहुत अच्छा व्यवहार करती है। वे सक्रिय कुत्ते हैं और बोरियत से जुड़े व्यवहार को रोकने के लिए इन्हें निरंतर उपयुक्त अभ्यास की जरुरत होती है जैसे चबाना, खोदना, या चाटना. बॉक्सर्स को “हठी” होने के लिए जाना जाने लगा है, यह अनुपयुक्त आज्ञाकारिता प्रशिक्षण से सम्बन्धित हो सकता है। इनकी होशियारी और इनकी नस्ल की काम करने की विशेषताओं के कारण, सुधार पर आधारित प्रशिक्षण की उपयोगिता अक्सर सीमित होती है।

अन्य जानवरों की तरह, बॉक्सर, आमतौर पर सकारात्मक सुदृढीकरण तकनीकों के लिए बेहतर प्रतिक्रिया करते हैं, जैसे क्लिकर प्रिशक्षण, व्यावहारिक शर्तों और आचरण पर आधारित दृष्टिकोण, जो कुत्ते को स्वतंत्र रूप से सोचने और समस्या का समाधान करने का मौका देते हैं। बार बार और सजा आधारित प्रशिक्षण के लिए उनके प्रतिरोध के कारण, आज्ञाकारिता प्रशिक्षकों के स्टेनले कोरेन के सर्वेक्षण के आधार पर, उनकी पुस्तक द इंटेलिजेंस ऑफ़ डॉग्स में बॉक्सर्स को उनकी औसत काम करने और आज्ञाकारिता की होशियारी के कारण 48 वें रेंक पर रखा गया।

बहुत से लोग जिन्होंने वास्तव में बॉक्सर्स के साथ काम किया है वे कोरेन के सर्वेक्षण के परिणामों से असहमत हैं और उनका कहना है कि एक कुशल प्रशिक्षक जो ईनाम आधारित विधियों का उपयोग करता है, वह पायेगा कि बॉक्सर्स में औसत से ज्यादा होशियारी और काम करने की क्षमता है।
स्वभाव से बॉक्सर आक्रामक या शातिर नस्ल नहीं है, लेकिन सभी कुत्तों कि तरह, इसे समाजीकरण की आवश्यकता होती है। बॉक्सर सामान्यतया छोटे कुत्तों और पिल्लों के साथ धैर्यपूर्ण व्यवहार करते हैं, लेकिन बड़े व्यस्क कुत्तों, विशेष रूप से समान लिंग के कुत्तों के साथ झगडे सकते हैं।

मादा बॉक्सर्स के बीच अधिक गंभीर लड़ाई भी हो सकती है। बॉक्सर सामान्यतया मनुष्य या किसी और केनायन के साथ में ज्यादा आरामपूर्ण महसूस करते हैं।

इतिहास

बॉक्सर कुत्तों के मोलोसर समूह का हिस्सा है, जिसक विकास 1800 के दशक के अंत में जर्मनी में अब विलुप्त हो चुके मासटिफ़ वंश के एक कुत्ते बुलेनबीसर और ग्रेट ब्रिटेन से लाये गए बुलडॉग से हुआ था।

बुलेनबीसर कई सदियों से एक शिकारी कुत्ते का काम कर रहा था, यह भालू, जंगली सूअर, हिरन का पीछा करता था। इसका काम था शिकार को पकड़ना और तब तक पकडे रहना जब तक शिकारी ना पहुंच जाये.

बाद के वर्षों में, तेज कुत्तों को अपनाया गया और उत्तरी बेल्जियम में छोटे बुलेनबीसर के संकरण से ब्रबंत (Brabant) बना दिया गया। यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है कि ब्रबंतर बुलेनबीसर वर्तमान बॉक्सर का प्रत्यक्ष पूर्वज था।

1894 में, फ्रेडरिक रॉबर्ट, एलर्ड कोनिग और आर. होपनर नाम के तीन जर्मन लोगों ने इस नस्ल को स्थिरीकृत करने का फैसला लिया और इसे एक डॉग शो में प्रदर्शनी में रखा. यह 1895 में मुनिच में किया गया और अगले साल उन्होंने पहले बॉक्सर क्लब, डेस्चर बॉक्सर क्लब (the Deutscher Boxer Club) की स्थापना की. क्लब 1902 में पहली बॉक्सर नस्ल के मानकों को प्रकाशित करता रहा, यह एक विस्तृत दस्तावेज था, जिसमें अब तक भी ज्यादा परिवर्तन नहीं किया गया है।

फ्रेडरिक रॉबर्ट और उनके बॉक्सर, 1894

इस नस्ल को 19 वी शताब्दी के अंत में यूरोप के हिस्सों में लाया गया और सदी बदलने तक यह संयुक्त राज्य अमेरिका में भी आ गया। अमेरिकी केनल क्लब (AKC) ने 1904 में पहले बॉक्सर का पंजीकरण किया और 1915 में पहले बॉक्सर चेम्पियन, देम्प्फ वोम डोम को मान्यता दी गयी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, बॉक्सर का उपयोग सैन्य कार्यों में सहायता के लिए किया गया, जहां इसने एक संदेशवाहक कुत्ते, पैक ले जाने वाले कुत्ते, आक्रामक कुत्ते और संरक्षक कुत्ते का काम किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तक भी बॉक्सर दुनिया में लोकप्रिय नहीं हुआ था। लौटते हुए सैनिकों ने उन्हें अपने ले जाते हुए कुत्ते को बहुत से दर्शकों से परिचित कराया और यह एक साथी, एक शो डॉग और एक संरक्षक कुत्ते के रूप में जल्दी ही लोकप्रिय हो गया।