बुलडॉग कुत्तों की एक प्रजाति का एक प्रचलित नाम है, जिसे इंगलिश बुलडॉग अथवा ब्रिटिश बुलडॉग भी कहा जाता है। बुलडॉग की अन्य प्रजातियों में अमेरिकन बुलडॉग अथवा फ्रेंच बुलडॉग भी होते हैं। बुलडॉग एक मजबूत व भारी कुत्ता होता है, जिसका चेहरा झुर्रियों से भरा तथा एक विशिष्ट चपटी नाक होती है। अमेरिकी केनेल क्लब (एकेसी), दि केनेल क्लब (ब्रिटेन) तथा यूनाइटेड केनेल क्लब (यूकेसी) द्वारा इनके प्रजनन सम्बन्धी मानकों की देखरेख की जाती है।

बुलडॉग प्रजाति की विशेषता चौड़े कंधे और मेल खाता हुआ सर होती है। बुलडॉग के माथे के अगले हिस्से पर खाल की मोटी पर्त होती है, साथ ही गोल, काली, तथा चौड़ी दृष्टि वाली आंखें, छोटा थूथन, जिसपर एक विशिष्ट मोड़, जिसे “रोप” कहा जाता है तथा गले के नीच लटकती खाल, नीचे की और मुड़े होंठ तथा नुकीले दांत होते हैं। इसके बाल छोटे, सीधे तथा आकर्षक होते हैं तथा इसके रंग लाल, हल्का पीला, सफ़ेद, ब्रिन्डल (लहरों अथवा पट्टियों के रूप में मिश्रित रंग) तथा इन सभी के साथ चितकबरे रंग भी पाए जाते हैं।

अमेरिका में, एक आम इंग्लिश बुलडॉग का वज़न वयस्क नर का 45 पौन्ड तथा वयस्क मादा का 45 पौन्ड माना जाता है। ब्रिटेन में इस प्रजाति का मानक वज़न नर के लिए 55 पौन्ड तथा मादा के लिए 50 पौन्ड माना गया है।

हालांकि कुछ श्वान प्रजातियों की पूंछ जन्म के कुछ समय बाद ही या तो काट दी जाती है अथवा उसे कोई आकार दे दिया जाता है, बुलडॉग उन गिनी-चुनी प्रजातियों में से हैं, जिनकी पूंछ प्राकृतिक रूप से छोटी तथा मुड़ी हुई होती है।

स्वभाव

अपनी प्रसिद्ध “बदमिजाज़” अभिव्यक्ति के बावजूद, आम तौर पर बुलडॉग विनम्र होते हैं, हालांकि छोटी दूरियों में वे बहुत तेज़ दौड़ सकते हैं। वे दोस्ताना और मिलनसार होते हैं, परन्तु कभी कभी जिद्दी भी हो जाते हैं। वाक्यांश “बुलडॉग की तरह जिद्दी” इसी तथ्य से शिथिल तौर पर जुड़ा हुआ है। स्टैनली कोरेन की रचना दि इंटेलीजेन्स ऑफ़ डॉग्स में इस प्रजात‍ि ने 80 में से 78वां स्थान पाते हुए कामकाजी/आज्ञाकारी कुत्तों में सबसे नीचे की श्रेणी अर्जित की है।

प्रजनकों नें इस प्रजाति की आक्रामकता को कम करने में सफलता प्राप्त की है और आमतौर से इस प्रजाति को अच्छे स्वभाव वाला कुत्ता माना जाने लगा है। बुलडॉग का अपने घर एवं परिवार से इतना लगाव हो जाता हैं कि वे किसी मनुष्य साथी के बिना बाड़े से बाहर निकलने का प्रयास भी नहीं करते. अपने दोस्ताना स्वभाव के कारण ही बुलडॉग बच्चों, अन्य कुत्तों तथा अन्य पालतू जीवों के साथ आसानी से रह लेते हैं।

स्वास्थ्य

बुलडॉग क्लब इस प्रजाति की औसत आयु 8 से 12 वर्ष आंकता हैं, हालांकि ब्रिटेन में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार यह 6.5 वर्ष मानी गयी है। सर्वेक्षण में पता चला कि बुलडॉग की मृत्यु के प्रमुख कारण ह्रदय सम्बन्धी रोग (20%), कैंसर (18%) तथा अधिक आयु (9%) थे। जिनकी मृत्यु अधिक आयु के कारण हुई, उनकी औसत आयु 10 से 11 वर्ष रही। 

जानवरों के लिए आर्थोपेडिक फाउंडेशन के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 1979 से 2009 के बीच (36 वर्ष) 467 बुलडॉग पर किये गए परीक्षण के अनुसार 73.9% कूल्हे की डिस्प्लेसिया से पीड़ित थे, जो कि किसी भी प्रजाति के लिए सर्वाधिक है। इसी प्रकार, ब्रिटिश पशु-चिकित्सक संघ/केनेल क्लब द्वारा की गयी हिप डिस्प्लेसिया स्कोरिंग स्कीम में भी बुलडॉग को सबसे ख़राब अंक प्राप्त हुए, हालांकि इसमें सिर्फ 22 बुलडॉग पर ही परीक्षण किये गए थे। पेटेलर लक्सेशन एक और बीमारी है जो 6.2% बुलडॉग को प्रभावित करती है।

इस प्रजाति के कुत्तों में इंटरडिजिटल गांठों का होना आम है, ये ऐसी गाठें होती हैं जो पैर के पंजों के बीच होती हैं। इनके कारण कुत्तों को कुछ परेशानी होती हैं, परन्तु इनका इलाज पशु-चिकित्सक अथवा अनुभवी पशु-स्वामी के द्वारा किया जा सकता है। उन्हें सांस की परेशानी भी हो सकती है।

अन्य समस्याओं में चेरी आई, जो कि आंख की पलक के भीतरी हिस्से में आये उभार की स्थिति होती है (इसका इलाज पशु-चिकित्सक द्वारा किया जा सकता है), कुछ एलर्जियां, तथा अधिक उम्र वाले बुलडॉग में कूल्हे की समस्याएं आदि शामिल हैं। पिल्लों का प्रजनन अक्सर सिजेरियन सेक्शन विधि से किया जाता है, क्योंकि प्राकृतिक जन्म की प्रक्रिया में इनका बड़ा सर मां की नाल में फंस जाता है। हालांकि, प्राकृतिक रूप से पिल्लों को जन्म देना किसी बुलडॉग के लिए अस्वाभाविक नहीं है। 80% से अधिक बुलडॉग सिजेरियन सेक्शन विधि की सहायता से ही जन्म लेते हैं।[8] बुलडॉग के चेहरे पर पड़ी सिलवटों अथवा “रोप” को नियमित रूप से रोज़ साफ़ किया जाना चाहिए, अन्यथा नमी इकठ्ठा होने से अनचाहे संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक रूप से मुड़ी हुई बुलडॉग की पूंछ कुछ कुत्तों में शरीर के साथ इतनी कड़ी हो जाती है कि उन्हें नियमित रूप से सफाई के साथ थोड़ा मरहम लगाने की आवश्यकता पड़ती है।

सभी कुत्तों की ही तरह बुलडॉग को भी रोजाना व्यायाम की आवश्यकता होती है। समुचित रूप से व्यायाम न करने पर बुलडॉग का वज़न बढ़ जाता है, जिससे ह्रदय तथा फेफड़ों की समस्याओं के साथ ही जोड़ों से सम्बंधित समस्याएं भी हो सकती हैं।

बुलडॉग तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। गर्म मौसम वाले क्षेत्रों और गर्मियों के महीनों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए। उन्हें अधिकाधिक पानी और छाया उपलब्ध कराये जाने के अतिरिक्त अवश्य ही सीधी ऊष्मा से भी बचाया जाना चाहिए। उन्हें स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए वातानुकूलन तथा खुलापन आवश्यक है। बुलडॉग के पैरों के पैड से सर्वाधिक पसीना निकलता है। आप देखेंगे कि बुलडॉग वास्तव में टाइल या सीमेंट जैसे ठन्डे फर्श का आनंद लेते हैं। वह इन्हें ठंडा रखने में मदद करती है। ऐसी समस्याएं जिनकी वजह से हवा का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, सभी “छोटे-चेहरे” वाले कुत्तों की तरह ही बुलडॉग के शरीर का भी तापमान बढ़ जाता है और इससे इनकी मृत्यु तक हो सकती है। इस अवरोध के कारण ही वे खर्राटे लेते हैं तथा उनकी सांस में से भारी आवाज़ आने लगती है, उनके खर्राटों की ध्वनि काफी ऊंची होती है। इन सभी समस्याओं पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है, सिर्फ आपको सजग रहते हुए अपने बुलडॉग को इन असुरक्षित स्थितियों से बचाने को तैयार रहने की आवश्यकता है। (EngBulldogs.com)

जनवरी 2009 में, बीबीसी (BBC) के वृत्तचित्र पेडिग्री डॉग्स एक्स्पोज्ड/0} के प्रदर्शन के बाद, दि केनेल क्लब ने स्वस्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निपटने के लिए बुलडॉग के साथ ही साथ 209 अन्य प्रजातियों के लिए संशोधित मानक जारी किये। प्रेस ने अनुमान लगाया कि श्वांस सम्बन्धी समस्याओं तथा सर के आकार व कन्धों की चौड़ाई के कारण हुई प्रजनन सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने के लिए किये गए उपायों के कारण प्रजाति में परिवर्तन के रूप में छोटा सर, खाल की कम सिलवटें, लम्बा थूथन तथा एक लम्बा एवं पतला शरीर हो जायेगा, जिसका ब्रिटिश बुलडॉग ब्रीड काउंसिल ने विरोध किया।

इतिहास

शब्द “बुलडॉग” का सर्वप्रथम प्रयोग वर्ष 1500 के आसपास के साहित्य में किया गया, जहां इस शब्द की वर्तनी बोन्डोग अथवा बोल्डोग के रूप में प्रयोग की गयी। आधुनिक वर्तनी के साथ शब्द का पहला संदर्भ 1631 या 1632 में प्रेसविक एटन द्वारा लिखे गए पत्र में है, जहां उसने लिखा “प्रोक्योर मी टू गुड बुलडॉग्स, एंड लेट देम बी सेंट बाई द फर्स्ट शिप”.[10] इसके नाम में शब्द “बुल” का प्रयोग इस कुत्ते को सांड़ों के खेल में दौड़ाने के कारण किया जाने लगा। मूल बुलडॉग को बहुत क्रूर तथा बर्बर होने के साथ ही साहसी तथा दर्द के प्रति असंवेदनशील होना होता था। 1835 से कुत्तों की लड़ाई को खेल के रूप में इंग्लैंड में गैर-क़ानूनी बना दिया गया। इसलिए पुराने इंगलिश बुलडॉग की उपयोगिता समाप्त हो चली थी तथा इंग्लैंड में उसके पास कुछ ही दिन बचे थे। हालांकि, अप्रवासियों को नयी दुनिया में ऐसे कुत्तों की आवश्यकता थी, जिसके परिणामस्वरूप मूल बुलडॉग के सबसे नज़दीकी वंशज, अमेरिकन बुलडॉग की उत्पत्ति हुई। जबकि इंग्लैंड में लोगों ने उन अवांछित “भयानक” विशेषताओं को समाप्त करने और श्रेष्ठ गुणों को बचाने तथा उन पर ज़ोर देने का प्रयास प्रारंभ किया। कुछ पीढ़ियों के भीतर ही, अंग्रेजी बुलडॉग श्रेष्ठ शारीरिक गुणों का नमूना बन गया, परन्तु इनमें वह मौलिक क्रूरता, क्षमता, शक्ति, गति तथा बुद्धिमत्ता नहीं थी।

17वीं शताब्दी में बुलडॉग का प्रयोग कुत्तों की लड़ाई (साथ ही साथ भालू के साथ लड़ाई में भी) में किया जाने लगा – यह 17वीं सदी का एक लोकप्रिय जुए का खेल था जिसमें दांव लगाने वाले बैठते थे तथा प्रशिक्षित बुलडॉग एक खूंटे से बंधे सांड़ के ऊपर से छलांग लगाते थे। बुलडॉग के आक्रमण का सबसे विशिष्ट तरीका पशु के थूथन पर आक्रमण करके उसका दम घोंटने का प्रयास होता था।

हालांकि, बुलडॉग की शुरूआती भूमिका केवल खेल तक ही सीमित नहीं थी। न्यूयॉर्क में मध्य 17वीं सदी में वहां के गवर्नर रिचर्ड निकोल्स के नेतृत्व में शहर की गश्त लगाने में बुलडॉग का प्रयोग किया जाता था। चूंकि जंगली सांड़ों को घेरना तथा किसी मार्ग पर ले जाना खतरनाक कार्य था, इसीलिए बुलडॉग को उनकी नाक को तब तक पकडे रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था, जब तक उनके गले में रस्सी डाल कर उन्हें बांध ना लिया जाये.ब्रिटेन में पशु क्रूरता अधिनियम, 1835 के द्वारा कुत्तों का उपयोग अन्य कुत्तों अथवा अन्य पशुओं के साथ लड़ाने में करना गैरकानूनी बना दिया गया था, परन्तु कुत्तों के विक्रेता बिल जॉर्ज द्वारा बुलडॉग को पालतू पशु के रूप में प्रोत्साहित किया जाता रहा। [13]

समय के साथ मौलिक इंग्लिश बुलडॉग का प्रजनन पग के साथ कराया गया। परिणामस्वरुप लघुशिरस्क खोपड़ी वाला छोटा तथा चौड़ा कुत्ता प्राप्त हुआ। हालांकि आज के बुलडॉग मज़बूत दिखते हैं, परन्तु वे वह काम नहीं कर सकते जिसके लिए मूलरूप से उन्हें बनाया गया था, उदाहरण के लिए वे सांड़ के साथ दौड़ने तथा उसके द्वारा फेंके जाना सहन नहीं कर सकते तथा इतने छोटे थूथन से वे मजबूती से पकड़ नहीं सकते.

सबसे पुराना एकल नस्ल की विशेषता वाला क्लब दि बुलडॉग क्लब (इंग्लैंड) है, जिसे वर्ष 1878 में स्थापित किया गया था। इस क्लब के सदस्य लन्दन में अक्सर ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर स्थित ब्लू पोस्ट पब में मिला करते थे। वहां उन्होंने इस प्रजाति के प्रजनन की परिशुद्धता का प्रथम मानक विकसित किया। 1891 में दो श्रेष्ठ बुलडॉग ऑरी तथा डॉकलीफ एक मुकाबले में सम्मिलित हुए, जो यह देखने के लिए था कि दोनों में से कौन ज्यादा दूर तक जा सकता था। ऑरी मूल बुलडॉग की याद दिलाता था, पतली हड्डियों वाला तथा बहुत बलिष्ठ. डॉकलीफ आधुनिक बुलडॉग की तरह ठिगना तथा भारी था। उस वर्ष डॉकलीफ को विजेता घोषित किया गया। हालांकि कुछ लोगों का तर्क था कि बुलडॉग का पुराना रूप अधिक दक्ष व कार्यक्षम था, आधुनिक रूप को चाहने वालों द्वारा अधिक पसंद किया गया, क्योंकि चलने की इस प्रतियोगिता में यह सिद्ध हुआ कि यह भी उतना ही दक्ष व बलिष्ठ था।

२० वीं सदी की शुरुआत में च. रौडनी स्टोन का मूल्य $5000 आंका गया जब उसे विवादस्पद आयरिश-अमेरिकी राजनैतिक हस्ती रिचर्ड क्रोकर द्वारा ख़रीदा गया।